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स्वामी विवेकानन्द सार्धशती समारोह
स्वामी विवेकानन्द लोगों के लिए एक महान प्रेरणा स्रोत है। उनके जीवन और संदेश ने अनेक लोगो को उनके जीवन में महान कार्य करने के लिए प्रेरित किया है । हम भारतीयों के लिए उनका कार्य अग्रणी है। उन्होने विज्ञान और आध्यात्मिकता, वेदान्त और नित्य व्यवहार में सामंजस्य स्थापित किया। १९६३ में उनकी जन्मशताब्दी अपूर्व उत्साह के साथ पूरे राष्ट्र में मनाई गई।
स्वामी विवेकानन्द के शताब्दी समारोह के दौरान कन्याकुमारी में समुद्र के मघ्य स्थित शिला पर उनका भव्य स्मारक निर्मित किया गया। पूरे देश ने इस भव्य स्मारक के निर्माण के लिए योगदान दिया। स्मारक के आगामी चरण के रूप में अध्यात्मप्रेरित सेवा संगठन, विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी का शुभारंभ हुआ। विवेकानन्द केन्द्र भारतभर में अपनी ६६३ शाखाओं और सेवा प्रकल्पों के माध्यम से कार्य कर रहा है ।
स्वामी विवेकानन्द की १५० वी जयंती वर्ष २०१३ में आ रही है। अनेक संगठनों, व्यक्तियों तथा भारत सरकार ने इस ऐतिहासिक घटना के अवसर पर भव्य आयोजन की पूर्वतैयारी शुरू कर दी है।
अमेरिका से लौटने पर स्वामी विवेकानन्द ने समग्र हिन्दू समाज को अपनेही उपेक्षित लोगों के लिए सेवाकार्य प्रारंभ करने प्रेरित किया। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि वेदान्त के आदर्श और हिन्दूओं के व्यावहारिक जीवन में बड़ा अंतर था। वह अधिक से अधिक व्यक्तियों को एक साधना के रूप में मानव की सेवा के लिए आगे लाना चाहते थे।
उनसे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रेरित होकर देश में अनेक हिन्दू संगठनों का प्रादुर्भाव हुआ। सन् २०१३ में स्वामी विवेकानन्द के जन्म की १५० वी शताब्दी समारोह के माध्यम से उनके संदेश के प्रभाव का अध्ययन करने, विवेकानन्द केन्द्र ने संगठनों की दो सूचियाँ तैयार करने का निर्णय किया है। एक ऐसे संगठन जो स्वामी विवेकानन्द के नाम पर कार्य कर रहे हैं तथा दूसरे ऐसे संगठन जो हिन्दू आध्यात्मिक और सेवा में रत है ।
आपसे इस अध्ययन के लिए अपने संगठन का विवरण देने का अनुरोध है ।
सार्धशती समारोह, विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी
http://www.vivekananda150jayanti.org










